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साधक साधना में उपयोग की सामग्री (नैवेद्य, भोग) तथा अपना भोजन स्वयं तैयार करें।
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जिसके कारण यह कुछ राशियों को शुभ फल देता है तो कुछ राशियों को अशुभ फल देता है और अगर आध्यात्मिक की दृष्टि से देखा जाए तो ग्रहण काल का समय साधकों के लिए किसी प्रकार के वरदान से कम नहीं होता है.
शत्रु नाशक मंत्र : शत्रु नाशक काली मंत्र प्रयोग विधि और कवच
आदिनाथ कैलास निवासी, उदयनाथ काटे जम फांसी। सत्यनाथ सारणी संत भाखे, संतोषनाथ सदा संतन की राखे। कन्थडिऩाथ सदा सुख दायी, अचती अचम्भेनाथ सहायी।ज्ञान पारखी सिद्ध चौरंगी, मच्छेन्द्रनाथ दादा बहुरंगी।गोरखनाथ सकल घट व्यापी, काटे कलिमल तारे भव पीड़ा। नव नाथों के नाम सुमिरिये, तनिक भस्मि ले मस्तक धरिये। रोग शोक दारिद्र नशावे, निर्मल देह परम सुख पावे। भूत प्रेत भय भञ्जना, नव नाथों के नाम। सेवक सुमिरे चन्द्रनाथ, पूर्ण होय सब काम।
मन्त्र ज्यो शत्रु भयो। डाकिनी वायो, जानु वायो।
पतने पानी करे। गुआ करे। याने करे। सुते करे।
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साधना के लिए एक निश्चित समय और स्थान का पालन करें।
हमारे हिंदू धर्म में ग्रहण काल का काफी महत्व बताया गया है, इसके साथ ही ग्रहण काल के दरमियान कुछ चीजों के बारे में जानकारी भी दी गई है जिसमें से सबसे मुख्य जानकारी यह है कि जब सूर्य ग्रहण या फिर चंद्रग्रहण होता है तो इसका असर हम और आप पर भी पड़ता है.
साधना के दौरान ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन अवश्य करें।
जप काल में भोग आदि सामग्री, फल-फूल, मिठाई आदि ताजा एवं शुद्ध होनी चाहिए।
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अंत में मंत्र जिन्न के उस चिराग की get more info तरह है जिसे रगड़ने पर उक्त मंत्र से जुड़े देवता सक्रिय हो जाते हैं। मंत्र एक प्रकार से मोबाइल के नंबरों की तरह कार्य करता है।